4 मार्च 1990 को यह शादी सम्पन्न हो गयी। शादी निपटने के बाद मैं अपने कॉलेज चला गया। अब पत्नी कभी गाँव पर रहती, कभी कॉलेज में रहती। प्रायः मैं अकेले ही कॉलेज में रहता। मेरे ही निर्देशन में जयपाल सिंह ने अपना पीएचडी का कार्य पूरा किया। प्रबन्धतंत्र ने दौड़ धूप करके इस शर्त के साथ प्रबन्धतंत्र को बहाल करा लिया कि यथाशीघ्र आडिट आपत्तियों का निराकरण करा दिया जायेगा। प्रबन्धतंत्र ने बालिकाओं का एक अलग कॉलेज चलाने की योजना बनायी किन्तु उनके पास कोई भवन नहीं था। वे चाहते थे कि डिग्री कालेज का एकाध कमरा मिल जाये