part -3सुहानी मोबाइल को देखे जा रही थी।स्क्रीन पर वही शब्द रुके हुए थे—“Harsh is typing…”उसने एक पल के लिए आँखें बंद कर लीं।जैसे उस एक लाइन में सिर्फ़ कोई मैसेज नहीं,बल्कि बहुत कुछ छुपा हो।उसने खुद से सवाल किया।“मैं इसे इतना सीरियस क्यों ले रही हूँ?”मैसेज आया।हर्ष:“शायद अचानक मैसेज करना अजीब लगे…लेकिन कल अच्छा लगा आपसे बात करके।”सुहानी ने पढ़ा। ब्लू टिक नहीं गया।उसने मोबाइल उल्टा रख दिया।हर्ष कुर्सी पर पीछे टिक गया।मैसेज सेंड हो चुका था।अब कुछ भी उसके हाथ में नहीं था।वर्क डैशबोर्ड खुला था—टास्क्स, डेडलाइन्स, मीटिंग्स।लेकिन दिमाग़ वहीं अटका था—seen होगा या नहीं?वर्क फ्रॉम होम