अनुराग और स्नेहा : रंगों और शब्दों का संगम

अनुराग की आँखें सुबह की हल्की, सुनहरी धूप में चमक रही थीं। आज का दिन किसी भी आम दिन से बिल्कुल अलग महसूस हो रहा था, जैसे हवा में कोई अनकही भविष्यवाणी घुली हो। वह अपने शहर के उस पुराने पार्क में बैठा था, जहाँ हर पेड़ की शाखा हवा के साथ एक पुरानी धुन में हिलती थी। यह पार्क अनुराग के लिए केवल पेड़-पौधों की जगह नहीं, बल्कि उसकी कविताओं का उद्गम स्थल था। वह अपनी डायरी में कुछ पंक्तियाँ उकेरने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसका ध्यान बार-बार सामने बैठी एक युवती पर जा रहा था।उसने पहली