PART–2सुहानी को घर पहुँचते ही एहसास हुआ कि कुछ छूट गया है।बैग खोला।डायरी थी।चाबियाँ थीं।मोबाइल था।लेकिन चार्जर नहीं था।उसने माथे पर हाथ रखा और गहरी साँस ली।“ग्रेट, सुहानी… आज का दिन भी अधूरा ही रहेगा।”चार्जर कोई बड़ी चीज़ नहीं थी,लेकिन मोबाइल का प्रतिशत 18% दिखा रहा थाऔर सुहानी जानती थी—आज उसे खुद से बचने के लिए मोबाइल की ज़रूरत पड़ेगी।कैफ़े याद आया।वही कोने वाली मेज़।और सामने बैठा वह लड़का…हर्ष।उसका चेहरा अनायास ही आँखों के सामने आ गया।शांत, सादा, बिना ज़्यादा सवाल किए बस सुनने वाला।सुहानी ने खुद को झटका।“बस एक अजनबी था,”उसने मन ही मन कहा।उधर हर्ष अपने कमरे