मनीष ने पहली बार इतना डर महसूस किया था।अपनी पत्नी के गुजर जाने पर भी वो इतना कमजोर नहीं हुआ था जितना आज लग रहा था। उसके दिमाग मे एक ही बात थी कि अपने बच्चों को वो सुरक्षित कैसे रखे,कैसे इस मुसीबत से उसे दूर रखे?उसके दिमाग के कई सारे खयाल एक साथ आ जा रहे थे। तभी विष्णु बाइक की चाबी लेकर बाहर आया ओर बोला चल प्रीतम चलेगा साथ ?मनीष ने जल्दबाजी में बोला कहा जा रहे हो बेटा? अपने पापा को इसे रिएक्ट करता देख विष्णु बोला पापा में तो बस यू ही