अदृश्य पीया - 11

(सुबह का वक्त।)(सुनीति रसोई में खड़ी है। चाय उबल रही है…वो ध्यान में नहीं।)(चाय उफनकर गिर जाती है।)सुनीति (खुद से चिड़कर) बोली - “ध्यान भी नहीं रहता अब…”(वो गैस बंद कर देती है।)दिन पर दिन सुनीति का सब्र कम होता जा रहा था।(कमरे में कौशिक बैठा है। चश्मा लगाए हुए।)कौशिक बोला - “सुनीति, आज दवा—”सुनीति (तेज़ आवाज़ में) बोली - “बाद में!अभी मेरे पास टाइम नहीं है।”(कौशिक चुप हो जाता है।)(सुनीति को एहसास होता है पर वो कुछ नहीं कहती।)(रात।)(कौशिक सो चुका है।)(सुनीति बाथरूम में बंद।)(नल खोल देती है ताकि आवाज़ बाहर न जाए।)(वो दीवार से टिककर बैठ जाती है।)सुनीति (सिसकते हुए, धीमी