बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी, और घर के अंदर का माहौल उससे भी ज्यादा तूफानी था। डाइनिंग टेबल पर खाना ठंडा हो चुका था। आर्यन अपनी प्लेट को घूर रहा था, जबकि महक की नजरें उसके चेहरे पर जमी थीं, जैसे वह उसकी खाल उतारकर अंदर छिपे सच को देख लेना चाहती हो।"आर्यन, मैं तुमसे कुछ पूछ रही हूँ," महक की आवाज ठंडी और कड़क थी।आर्यन ने गहरी सांस ली और बिना नजरें मिलाए कहा, "महक, मैंने कहा न, कुछ नहीं है। बस ऑफिस का तनाव है। तुम बात का बतंगड़ बना रही हो।""तनाव?" महक ने अपना फोन मेज