यह कहानी “मैं दादा-दादी की लाडली” का दूसरा भाग है।बचपन की मासूमियत के बाद, अब ज़िंदगी ने मुझेपहली बार अधूरे प्यार से मिलवाया।एक ऐसा एहसास, जो मिला नहीं…पर दिल में हमेशा के लिए बस गया।अध्याय 2 – अधूरा प्यार।तुम्हें लाइफ में कैसा पार्टनर चाहिए?” सब अपनी पसंद बताती, हँसी-मजाक के साथ, और मैं चुप-चाप उनकी बातें सुनती। फिर मेरी बारी आई। मैने कहा, "मुझे ऐसा पार्टनर चाहिए जो मुझे पूरा तरह प्यार करे, सोलमेट टाइप। और मैं उसके लिए पूरी दुनिया लूट दूंगी।” पर जिंदगी का खेल कुछ और था। मेरा प्यार मिला... पर अधूरा। सिर्फ एक तरफ़ा प्यार, जो मेरे दिल के कोने में छुप गया। हर दिन