वरदान - 5

बड़ी रानी का दिखावा इतना सधा हुआ था कि छोटी रानी पूरी तरह उसके प्रभाव में आ गई।  जब भी बड़ी रानी राजवर्धन को अपनी गोद में उठाती, उसे प्यार से खिलाती और उसके लिए चुपचाप उपहार बनवाती, तो छोटी रानी का हृदय भावुक हो उठता।छोटी रानी" मन ही मन सोचती:‘वाह! मेरी बड़ी दीदी तो सचमुच मुझसे भी अधिक मेरे पुत्र से प्रेम करती हैं। मैं तो भाग्यशाली हूँ कि राजवर्धन को ऐसी माँ-सा स्नेह देने वाली संगिनी मिली है।’वह कई बार बड़ी रानी से कहती भी—“दीदी, आप तो सचमुच मेरे बेटे को मुझसे भी अधिक दुलार देती हैं। कभी-कभी