अद्भुत थीं चुनमुन की सौगा़तेंमंटू ,जिसके बारे में मैंने पिछली पोस्ट में लिखा,के एक बच्चे का नाम हमने 'चुनमुन' रखा । सिर से पैर तक बेदाग़ ग्रे रंग। ' ऐसे रंग की बिल्ली तो कभी देखी नहीं...' जैसे वाक्य खुशी देते थे ,लेकिन उसकी क़द्र तो तब बढ़ी जब उसे पहली बार डॉक्टर के पास ले जाया गया। उसके कमज़ोर दिल को मज़बूती देने के लिए इंजेक्शन लगने लगे।जब चुनमुन डॉक्टर के हाथों में पहुंचती,तभी वह उसकी बीमारी से कहीं ज़्यादा उसके विदेशी घराने की टोह लेने में लग जाता था। मंटू की बेटी होने के हमारे सच को वह बड़े अविश्वास से सुनता