इश्क़ का पैगाम

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इश्क़ कभी अचानक नहीं होता।वो धीरे-धीरे किसी के लहजे में उतरता है, किसी की आँखों में ठहरता है और फिर इंसान की पूरी ज़िंदगी पर अपना नाम लिख देता है।आलिया को भी नहीं पता था कि उसे इश्क़ कब हुआ।शायद उस दिन, जब उसने पहली बार अयान को खामोशी से मुस्कुराते देखा था…या शायद तब, जब उसकी बातों में सवाल कम और अपनापन ज़्यादा महसूस हुआ था।आलिया शहर के पुराने हिस्से में रहती थी। तंग गलियाँ, झुके हुए मकान, और हर खिड़की के पीछे छुपी कोई न कोई कहानी। उसका घर भी वैसा ही था—पुराना, मगर यादों से भरा हुआ।