बिल्ली जो इंसान बनती थी

Heroine: शानवी सिंहHero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान)शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था।बड़े शहर में छोटी सी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात होते ही सन्नाटा उसकी छाती पर बैठ जाता।फोन में न कोई मैसेज, न किसी की कॉल। बस दीवार पर टंगी घड़ी की टिक-टिक।उस दिन भी ऑफिस से लौटते हुए उसने खुद से कहा —अब और नहीं… मुझे कोई चाहिए।और उसी शाम, वो एक बिल्ली ले आई। एक सफेद सा, बहुत मासूम सा बिल्ली का बच्चा। उसकी आंखें अजीब सी गहरी थीं… जैसे कुछ कहना चाहती हों। वो बहुत प्यासा