एक दिन देर शाम तक दोनों ऑफिस में ही थे।काम खत्म होने के बाद अर्शित ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—“मिस शर्मा, मुझे आप पर भरोसा था… और आज लग रहा है कि मेरा भरोसा बिल्कुल सही जगह लगाया गया था।”सिया ने पहली बार खुलकर मुस्कुराते हुए जवाब दिया—“सर, यह सब आपकी वजह से है। अगर आपने मुझ पर भरोसा न किया होता, तो शायद मैं आज भी डर में जी रही होती।”उस पल सिया को एहसास हुआ—जयपुर ने उसे सिर्फ़ नई नौकरी नहीं दी थी,बल्कि खुद पर भरोसा करना भी सिखाया था।और यही उसकी ज़िंदगी की असली शुरुआत थी…सिया