संतुलन की तलाश : प्रभजोत सिंह की कहानी

प्रभजोत सिंह और संतुलन का सिद्धांतप्रभजोत सिंह किसी बड़े शहर में पैदा नहीं हुआ था।उसके आसपास ऊँची इमारतें नहीं थीं,न ही महँगी लैब्स या चमकदार कॉलेज।उसके पास जो था, वह बहुत साधारण था—एक छोटा कमरा,कुछ पुरानी किताबें,और एक ऐसा दिमाग़जो सवाल पूछना बंद नहीं करता था।बचपन से ही प्रभजोत को चीज़ें “जैसी बताई जाती हैं” वैसी मान लेना अच्छा नहीं लगता था।जब कोई कहता, “ऐसा ही होता है”,तो उसके मन में पहला सवाल उठता—“पर क्यों?” सवालों से दोस्तीएक रात वह छत पर लेटा हुआ था।आसमान साफ़ था।तारे स्थिर दिख रहे थे,पर वह जानता था कि वे भी चल रहे