लाल पत्थर का राज

वह अजीब निशान और सुबह का हंगामाप्रस्तावना: वह खूनी रात (सपना)अंधेरा... सिर्फ घना अंधेरा और चारों तरफ खून की गंध।यह एक विशाल साम्राज्य की कालकोठरी, जहाँ की दीवारों पर कभी सोने की नक्काशी होती थी, आज वहां सिर्फ लोहे की जंजीरों की खनखनाहट थी। वह सम्राट, जिसके एक इशारे पर लाखों तलवारें उठ जाती थीं, आज मजबूत जंजीरों ने हाथों को जकड़ा हुआ था। उसकी गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने अपनी शक्ति से ज्यादा अपने परिवार के भाइयों पर भरोसा किया। उसके भाइयों ने उसकी दयालुता को कमजोरी समझा और सत्ता के लालच में उसे धोखा दिया।सम्राट और महारानी