आईने के पीछेपुरानी हवेलियों की अपनी एक ज़ुबान होती है। वे हवाओं के झोंकों में फुसफुसाती हैं, उनकी दीवारों की दरारें गुज़रे हुए वक्त की कहानियाँ सुनाती हैं, और उनके अंधेरे कोनों में यादें धूल बनकर जम जाती हैं। आर्यन के लिए उसका पैतृक घर किसी भूलभुलैया से कम नहीं था। शहर की आपाधापी से दूर, पहाड़ों की गोद में बसा यह घर उसके दादा-दादी की आखिरी निशानी था।आर्यन एक लेखक था, और लेखक की सबसे बड़ी कमजोरी (या ताकत) उसकी कल्पनाशीलता होती है। वह यहाँ अपनी अगली किताब पूरी करने आया था। लेकिन उसे क्या पता था कि वह