मंटू:एक कथा

मंटू :एक कथाबिल्ली पालने का शौक़ मुझे कभी नहीं रहा। किसी भी जानवर को छूने,देखने में भी मुझे कभी डर लगा करता था। तो भी एक समय में हमारा घर, न चाह कर भी, ' बिल्लियों वाला घर' के रूप में कैसे प्रसिद्ध हुआ,इसकी एक आश्चर्यजनक कहानी है।उस दिन कमरे में मैं अकेली बैठी हुई थी ।अचानक  एक  बड़ी बिल्ली आकर मेरी गोद में बैठी और सो गई। सब कुछ तेज़ी से घटित हुआ । मुझे उठने का उसने मौका ही नहीं दिया।उसकी चमकती हुई बेदाग काली त्वचा , ख़ूबसूरत कंचों जैसी अंधेरे में भी चमकती हुई हरी ऑंखें ,उसके