सुबह की हल्की धूपShreya balcony में खड़ी हल्की हवा महसूस कर रही है।आँखों के नीचे हल्की थकान — रात भर की जागी हुई।कप में हल्की चाय।Karan धीरे-धीरे चुपचाप आता है, उसके पास खड़ा होता है।जैसे बिना आवाज़ किए उसकी हालत समझ गया हो।Karan (हल्की मुस्कान के साथ) बोला - रात भर सोई नहीं ना ?Shreya चौंकती नहीं—उसे पता है Karan उसे observe करता है quietly.Shreya (धीमे से) बोली - डर लग रहा था…और आप दोनों सो रहे थे।Karan उसके हाथ से कप लेता है और चाय की चुस्की लेता है।Karan बोला - तुम्हारे डरने का reason मैं हूं.... तो तुम्हारा थोड़ा सा डर