'जैकब्स हॉस्टल' के बाहर सन्नाटे को चीरती हुई बर्फीली हवाएं चल रही थीं। छुट्टियों का सीजन था, इसलिए जो हॉस्टल कभी 500 लड़कों के शोर से गूँजता था, आज वहाँ मुर्दा शांति पसरी थी। करीब 95% स्टूडेंट्स घर जा चुके थे। पूरे हॉस्टल में गिने-चुने 20-30 लड़के ही बचे थे।थर्ड फ्लोर के कमरा नंबर 304 में बैठा 18 साल का वंश अपनी बेबसी पर झुंझला रहा था। उसका रूममेट भी घर जा चुका था। रात का 1 बज रहा था और नींद आँखों से कोसों दूर थी। वंश फ्रेश होने के लिए वॉशरूम गया ही था कि तभी कमरे के