तेरी मेरी कहानी - 4

अर्शित गुस्से और बेचैनी के बीच अपने घर पहुँचता है। उसके दिमाग़ में सिर्फ़ सिया का चेहरा घूम रहा था—सिया की चुप्पी, उसकी मजबूरी और उसकी आँखों का दर्द। सब कुछ अर्शित के दिमाग़ में लगातार चल रहा था। वह बार-बार खुद से पूछ रहा था—“ये कैसी माँ है जो अपनी ही बेटी के बारे में ऐसी बातें कर रही थी और उस पर हाथ उठा रही थी?”यह सवाल उसके ज़ेहन में बार-बार गूंज रहा था।उस रात अर्शित सो नहीं पाया।सुबह ऑफिस पहुँचते ही उसने सिया को अपने केबिन में आने को कहा। सिया जैसे ही केबिन में गई ,