हड्डियों से बने उस शहर के बीच खड़े अमन और रिया की साँसें बेकाबू थीं, दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि लगता था अभी सीना फाड़कर बाहर आ जाएगा, चारों तरफ़ इंसानी खोपड़ियों से बने खंभे थे जिन पर सूखे खून की परत जमी हुई थी, हवा में सड़ांध और जलते मांस की गंध मिली हुई थी, जैसे यहाँ मौत रोज़ सांस लेती हो, शहर की गलियाँ पत्थर की नहीं बल्कि हड्डियों की थीं जो हर कदम पर चरमराती थीं, जैसे किसी ज़िंदा चीज़ पर चल रहे हों, रिया ने अमन का हाथ कसकर पकड़ लिया, उसकी उँगलियाँ ठंडी