रेड कोर - 2

आरव की चेतना धीरे-धीरे लौट रही थी। उसके शरीर में दर्द नहीं था, बल्कि एक अजीब सी गर्मी दौड़ रही थी, जैसे उसकी नसों में आग बह रही हो। जब उसने आँखें खोलीं तो सामने का आसमान नीला नहीं, बल्कि मुहिब भाई कुछ भी करने से पहले एक मीटिंग किया करो, उसमें भरोसेमंद लोगों को बुलाया करो एक बार समझाओ दो बार समझाओ, फिर भी बात न समझ आए तो एक्शन लो छोटी-मोटी गलती हो जाती है और कभी दूसरे को फ़ायदा भी मिल जाता है, लेकिन आजकल लोग काम निकलते ही दूसरा रास्ता अपना लेते हैं, इसलिए पहले अपना