शाही दावतमुंबई की दोपहर की चिलचिलाती धूप अब विहान के शरीर को जला नहीं रही थी, बल्कि उसे अपनी नई शक्ति का एहसास करा रही थी. भिंडी बाजार की उन तंग और बदबूदार गलियों से बाहर निकलते समय उसके बैग का भार बढ चुका था. रुपये सत्रह लाख चालीस हजार—एक ऐसी रकम, जिसके बारे में विहान ने अपने पूरे जीवन में केवल सपनों में सोचा था. लेकिन आज वह कागज के उन टुकडों का मालिक था.उसने एक ऊँची इमारत के नीचे स्थित' ग्लोबल मोबाइल वर्ल्ड' में कदम रखा. अंदर की एअर- कंडीशनर हवा ने उसके ओवरकोट के भीतर छिपे पसीने