भूत सम्राट - 10

हवेली के उस विशाल दरबार में समय जैसे किसी पत्थर की तरह जम गया था। पेंटिंग से निकला वह मायावी दृश्य जैसे ही समाप्त हुआ, चारों ओर फिर से वही श्मशान जैसा सन्नाटा छा गया। अविन अब भी उस काले, नक्काशीदार सिंहासन पर बैठा था, लेकिन उसकी देह किसी ठंडे संगमरमर की तरह कांप रही थी।उसके मस्तिष्क में यादों का एक भयानक ज्वार उमड़ रहा था। वह अनाथालय की वे सूनी रातें, हॉस्टल की वह चुभती हुई खामोशी, और बरसों तक टैक्सी चलाते हुए अपनी किस्मत को कोसना—सब कुछ उसे अब एक क्रूर झूठ जैसा लगने लगा। वह कोई मामूली