(सुबह की धूप कमरे में आ रही है।)(कौशिक आईने के सामने खड़ा है — पूरी तरह साफ़ दिख रहा है।)कौशिक (मुस्कुराकर) बोला - “मैं सच में ठीक हूँ, सुनीति।”(सुनीति राहत की साँस लेती है।)सुनीति बोली - “आज पहली बार डर नहीं लग रहा।”(वो दोनों साथ नाश्ता करते हैं — बिल्कुल आम कपल की तरह।)(ड्रॉइंग रूम – पूरा परिवार मौजूद है।)राकेश बोला - “अब कोई परछाईं नहीं, कोई अदृश्यपन नहीं।सब कुछ नॉर्मल है।”राधिका (हँसते हुए) बोली - “लगता है किस्मत ने आखिरकार चैन दे दिया।”(कौशिक सबको देखकर सिर झुकाता है — कृतज्ञता में।)(ऑफिस – कौशिक लैपटॉप पर काम कर रहा है।)कौशिक फिर से ज़िंदगी की