वाराणसी शहर की महिमा (कहानी – लगभग 1500 शब्द) प्रस्तावनागंगा के तट पर बसा वाराणसी, जिसे काशी और बनारस भी कहा जाता है, केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं है। यह आस्था का केंद्र है, यह जीवन और मृत्यु का संगम है। यहाँ हर घाट, हर गली, हर मंदिर में सदियों की कहानियाँ छिपी हैं। ---पहला दृश्य: आगमनराघव, दिल्ली का एक युवा लेखक, पहली बार वाराणसी आया था। उसके मन में उत्सुकता थी—क्या सचमुच यह शहर उतना ही पवित्र है जितना लोग कहते हैं? ट्रेन से उतरते ही उसे लगा कि वह किसी और ही लोक में प्रवेश कर चुका है। स्टेशन से बाहर निकलते