लोहड़ी

---कहानी: "लोहड़ी ️ लेखक: विजय शर्मा एरी  ---प्रस्तावनाजनवरी की ठंडी रातें पंजाब की मिट्टी पर अपनी पूरी ताक़त से उतरती हैं। खेतों में सरसों के फूल पीले रंग से धरती को सजाते हैं, गन्ने की मिठास हवा में घुलती है। ऐसे समय में गाँव-गाँव में अलाव जलते हैं और लोग लोहड़ी का पर्व मनाते हैं। यह केवल फसल का उत्सव नहीं, बल्कि रिश्तों की गर्माहट और सामूहिकता का प्रतीक है।  ---पहला दृश्य: गाँव सुखपुरा की हलचलगाँव सुखपुरा में लोहड़ी की तैयारियाँ ज़ोरों पर थीं।  - महिलाएँ तिल और गुड़ से लड्डू बना रही थीं।  - बच्चे गन्ने की बंडियाँ उठाकर चौपाल तक ला रहे थे।  -