वाशिकारिणी - 6

इच्छा : प्रेम या प्रेतखाई के किनारे खड़ा शक्ति काँप रहा था।नीचे अंधेरा था… अंतहीन।उसी अंधेरे से एक जानी-पहचानी खुशबू उठी—इच्छा की।“ये… ये मुमकिन नहीं…”शक्ति की आँखों से आँसू बह निकले।तभी अंधेरे से एक आकृति उभरी।सफ़ेद कपड़ों में लिपटी हुई…खुले बाल…चेहरा झुका हुआ।“इच्छा…?”शक्ति की आवाज़ टूट गई।वो धीरे-धीरे ऊपर आई।उसके पाँव ज़मीन को छू ही नहीं रहे थे।“शक्ति…”उसकी आवाज़ वैसी ही थी—नरम… काँपती हुई।शक्ति आगे बढ़ा,“मुझे माफ़ कर दो… मैं लौट आया हूँ… तुम्हें लेने…”इच्छा ने सिर उठाया।उसका आधा चेहरा वैसा ही था जैसा शक्ति याद करता था—सुंदर… मासूम।लेकिन आधा चेहरा…जला हुआ।हड्डियाँ झलक रही थीं।एक आँख से खून बह रहा