दो दिल कैसे मिलेंगे - 45

पुनर्मिलन की शांति अभी पूरी तरह उतरी भी नहीं थी कि आकाश में अचानक काले बादल घिर आए। हवा भारी हो गई, जैसे किसी ने स्वयं समय की सांसें रोक दी हों। धरती में दरारें पड़ने लगीं और उन दरारों से वही परिचित, भयावह ऊर्जा उठी—प्राक्षिरोध।अधिराज की आंखें चौकन्नी हो गईं। “नहीं… यह ऊर्जा… मैं इसे पहचानता हूं…”एकांक्षी का हृदय तेज़ धड़कने लगा। उसके भीतर छिपी जिवंत मणि ने पहली बार स्पष्ट रूप से प्रतिक्रिया दी। उसके सीने में हल्का-सा प्रकाश जाग उठा, जैसे किसी ने भीतर से दस्तक दी हो।अंधकार के बीच से एक विशाल आकृति उभरी—आग और छाया