दो दिल कैसे मिलेंगे - 43

ही एकांक्षी की धुंधली आंखों के सामने अधिराज की आकृति स्पष्ट हुई, उसका हृदय जोर से धड़क उठा। स्मृतियों की टूटी हुई कड़ियां एक क्षण के लिए आपस में जुड़ गईं।“अ… अधिराज…!”उसके होंठ कांप उठे।बस यही एक क्षण विक्रम के लिए सबसे ख़तरनाक था।विक्रम की आंखों में पागलपन उतर आया। “नहीं… तुमने उसे पहचान लिया…!”बिना एक पल गंवाए उसने अपनी नाग-शक्ति को जागृत कर दिया। उसकी आंखें सर्प जैसी चमकने लगीं, गर्दन पर नीली रेखाएं उभर आईं। पूरा किला फुफकारती ऊर्जा से भर गया।“अब बहुत हो चुका,” विक्रम गरजा,“अगर तुम मेरी नहीं हो सकतीं… तो किसी की भी नहीं!”उसने हाथ