न्याय की प्रतीक्षा में निर्मला

न्याय की प्रतीक्षा में निर्मला“माँ, होमवर्क करके जल्दी लौट आऊँगी।”निर्मला ने अपने दोस्तों के लिए छोटे से प्लास्टिक में कुछ अमरूद बाँधे, अपनी पुरानी साइकिल निकाली और मुस्कुराते हुए घर के आँगन से निकल गई।दिन ढल गया।शाम हो गई।लेकिन निर्मला नहीं लौटी।बम दीदी-बहन के घर से दोपहर 2 बजे ही निकल चुकी निर्मला, शाम 8 बजे तक भी घर नहीं पहुँची। घबराए हुए माता-पिता पुलिस चौकी पहुँचे। वहीं उन्हें राज्य से पहला धोखा मिला।“किसी लड़के के साथ चली गई होगी, घूम रही होगी।”अपनी बेटी के लापता होने की पीड़ा से तड़पते माता-पिता पर वर्दीधारी रक्षकों की यह असंवेदनशील टिप्पणी थी।