मंच पर उद्घाटन फिर शुरू। मंत्री ने रिबन काटा। पहली ट्रेन सीटी बजा कर आई। पृथ्वी-सनाया ने प्लेटफॉर्म पर खड़े होकर तालियाँ सुनीं। शहर ने जश्न मनाया। शाम को घर लौटे। सनाया ने कहा, "सब खत्म। अब हमारा बच्चा आएगा—स्टेशन की तरह मजबूत, प्यार से भरा।" पृथ्वी हँसा, गले लगाया। "हाँ, बेटा हो या बेटी—राठौर-ठाकुर का वारिस। बगावत के सुर हमेशा के लिए शांत।"एपिलॉग: नई सुबहमहीनों बाद स्टेशन चहल-पहल से गुलजार। पृथ्वी स्टेशन मैनेजर, सनाया सोशल वर्कर—गरीबों के लिए ट्रेन टिकट स्कीम चला रही। विक्रम पार्टनर, शादीशुदा। रमेश प्रमोशन पा चुका। एक शाम बालकनी में सनाया बोली, "याद है वो