इस घर में प्यार मना है - 7

रात…जब पूरा घर नींद के बोझ से खामोश हो जाता—तभी कदमों की आहट धीरे-धीरे उस अंधेरे कमरे की ओर बढ़ती।कार्तिक हर रात आता। बिना आवाज़ किए। बिना किसी को बताए। उसके हाथ में हमेशा एक ही चीज़ होती , डार्क चॉकलेट।छोटी-सी। सादी-सी। पर उस कमरे में किसी खजाने से कम नहीं।संस्कृति उसे देखते ही समझ जाती—आज भी वो अकेली नहीं है। कार्तिक धीरे से उसके पास बैठता।फिर उसे अपनी गोद में बिठा लेता।कार्तिक (हल्की मुस्कान के साथ) बोला - धीरे-धीरे खाना…दर्द में मीठा अच्छा लगता है।संस्कृति बच्चों की तरह छोटे-छोटे कौर लेती। कार्तिक को खिलाने की कोशिश करती।पर कार्तिक बोलता - मुझे