राजमहल का प्रसव कक्ष उस समय दीपों की रौशनी और मंगल ध्वनियों से जगमगा रहा था। चारों ओर रेशमी परदे लटक रहे थे, जिन पर सोने की महीन कढ़ाई की गई थी। फर्श पर स्वच्छ सफ़ेद चादरें बिछी थीं और हवा में चंदन और केसर की सुगंध फैली हुई थी।कक्ष के एक ओर वैद्य और दाइयाँ व्यस्त थीं, उनकी आँखों में उत्सुकता और चेहरे पर गंभीरता थी। जैसे ही शिशु की पहली किलकारी गूँजी, वैद्य ने प्रसन्न होकर घोषणा की—'राजकुमार का जन्म हुआ है!' तुरंत दाइयों ने रत्नजड़ित थालियों में हल्दी-कुमकुम, पुष्प और दीप रखकर शुभ वाणी उच्चारी।छोटी रानी बिस्तर