पहला प्यार : अनकहा एहसास - भाग 2

भाग - 2 : टूटे सपनों की आवाज़ लंच ब्रेक की वो भीड़ मानो थम सी गई थी। समीक्षा अभी भी सीढ़ियों पर गिरी हुई थी, उसके घुटने में हल्की खरोंच आ गई थी, लेकिन उससे ज्यादा चोट उसके आत्मसम्मान को लगी थी।​सृजन, जिसने उसे गिरते हुए देखा था, अपनी जेब में हाथ डाले, बिना किसी भाव के वहाँ से ऐसे गुजर गया जैसे कुछ हुआ ही न हो। उसकी आँखों में न हमदर्दी थी, न कोई पछतावा। बस एक अजीब सा सूनापन और अकड़।​ अरे, तुम ठीक तो हो? समीक्षा की सहेली, रिया, दौड़ते हुए आई और उसे सहारा देकर उठाया।समीक्षा