तलाश: रूह का किनारा

यह कहानी है आरोही की, जो अपनों के बीच रहकर भी पराई थी। यह कहानी है उस अजनबी की, जो बिना किसी पते के आया और रूह में बस गया। जब प्यार मुकम्मल होने की दहलीज पर था, तभी किस्मत ने एक ऐसा पत्ता फेंका जिसने सब कुछ बदल दिया। क्या प्यार समय और दुनिया की सीमाओं को पार कर सकता है? या कुछ कहानियां अधूरी रहने के लिए ही लिखी जाती हैं?अध्याय 1: भीड़ में तन्हाआरोही अपने घर की सबसे बड़ी और लाडली बेटी थी। एक समय था जब उसकी खिलखिलाहट से पूरा घर गूँजता था। लेकिन वक्त की