असुरविद्या - 4

पैसा एक साधनसुबह के ठीक सात: चौदह बज रहे थे. मुंबई की सडकों पर उमस और शोर का कब्जा होने लगा था. कमरे की खिडकी से आती धूप की किरणें आज विहान को चुभ नहीं रही थीं, बल्कि उसकी नई हकीकत पर मुहर लगा रही थीं. उसने फर्श पर पडे बैग में अपना सामान समेटा. उसने सोने के भारी ताले को और चाबी को अपने बिस्तर के नीचे, फर्श के एक ढीले पटिए के नीचे छिपा दिया—वह उसका' इमर्जेंसी रिजर्व' था.बैग में अब केवल वह नकली रोलेक्स घडी, सोने का कडा और वह चेन थी, जिसे कल रात उसने अपने