टीम धीरे-धीरे टूटी दीवार के रास्ते लैब के अंदर घुसती है। अँधेरा है, लेकिन मशीनों की धीमी-धीमी आवाज़ गूँज रही है। चारों तरफ़ तार, केमिकल के बड़े-बड़े कंटेनर और लाल-नीली लाइट्स।राकेश (फुसफुसाकर) बोला - “यही है वो जगह… जहाँ खतरनाक प्रयोग होते हैं।”(अचानक दीवार पर लगी स्क्रीन अपने आप जल उठती है। उस पर अजीब कोड्स और फॉर्मूलों की झलक आती है। सुनेति ठिठक जाती है।)सुनीति बोली - “ये वही फॉर्मूला है… जो डायरी में लिखा था।”(गुंजन कंप्यूटर हैक करने लगती है। तभी काँच के बड़े चैंबर में हल्की रोशनी होती है। सब चौंककर देखते हैं। चैंबर के अंदर कुछ इंसानी सिलुएट्स