बगावत के सुरएपिसोड 10: अंतिम जंग, नई सुबह )दरभंगा की सर्द हवाएँ अब गर्माहट से लबरेज़ हो चुकी थीं। रेलवे स्टेशन प्रोजेक्ट चमक-दमक के साथ तैयार खड़ा था—चकाचौंध प्लेटफॉर्म, आधुनिक सिग्नलिंग, ट्रेनों की सीटी गूँज रही। उद्घाटन का दिन करीब था। पृथ्वी राठौर और उनकी पत्नी सनाया राठौर (पहले ठाकुर) हनीमून के बाद नई जिंदगी बसा चुके थे। हर सुबह सनाया चाय बनाती, पृथ्वी साइट का निरीक्षण करता। विक्रम, सनाया का सौतेला भाई, पूरी तरह सुधर चुका—अब साइट का सुपरवाइजर। रमेश सिक्योरिटी चीफ। लेकिन जेल से भानु प्रताप का मैसेज भूल न पाए। "मेरा आखिरी हथियार बाकी। स्टेशन उद्घाटन पर