एक पुराने मंदिर में शरण ली। माया ने बच्चे को स्तनपान कराया। नीली दूध की धारा ऊर्जा को शांत कर रही थी। इशान दर्द से तड़प रहा था। "माफ करना... मेरा अतीत मुझे खा गया। लेकिन अब, मैं तुम्हारा हूँ।" माया ने आंसू बहाए। "प्रेम विश्वासघात से बड़ा है।" उन्होंने चुंबन लिया, बच्चा चमक उठा। नीलकमल सिकुड़ने लगा।लेकिन तभी मंदिर की दीवार फटी। एक साया—विमला, लेकिन विकृत। "बच्चा मेरा है!" उसने झपटा। माया ने बच्चे को ढक लिया। ऊर्जा का संग्राम शुरू। विमला चली गई, लेकिन नीलकमल फिर फैला। बच्चे की आँखें खुलीं—उसमें एक नया रहस्य: वह इशान और माया