एपिसोड 12: जन्म और विश्वासघात का तूफानशहर की सड़कों पर लोग अभी भी हक्के-बक्के थे, लेकिन आकाश में फैला नीला नीलकमल तेजी से बढ़ रहा था। माया और इशान एक पार्क में रुके। माया का पेट दर्द से सिकुड़ रहा था। "समय आ गया," वह सिसकी। इशान घबरा गया। "यहाँ नहीं! अस्पताल ले चलूँ?" लेकिन माया ने मना किया। "ऊर्जा इसे चुनती है। बाहर, प्रकृति में।"वे घास पर लेट गए। माया ने साँसें गिनीं। नीली चमक उसके शरीर से फैलने लगी। इशान ने उसका हाथ थामा। "मैं हूँ ना। हमारा बच्चा... हमारी उम्मीद।" उनके स्पर्श से रोमांस की लालिमा ऊर्जा