श्रापित एक प्रेम कहानी - 38

वर्शाली एकांश से कहती है----वर्शाली : - एकांश जी आप मुझे अपने घर तक पहूँचा देंगे ? सत्यजीत कहता है--सत्यजीत :- कैसी बात कर रही हो बेटी तुम इस हालत घर कैसे जाओगी तुम अभी हमलोग के साथ चलोगी। एकांश भी वर्शाली से कहता है --एकांश :- हां वर्शाली ऐसी हालत में तुम वहाँ नहीं जा सकती । वर्शाली सबको समझा कर कहती है--वर्शाली: - मैं अब ठीक हु आप सब मेरी चिंता ना करे। अगर में घर नहीं पँहूची तो मेरे बाबा चिंतित हो जाएंगे। इसिलिए मुझे जाना पड़ेगा। सभी वर्शाली की बात सुनता है और इंद्रजीत एकांश से कहता है---इंद्रजीत :- बेटा तुम