कुकर की दूसरी सीटी बज रही है और मेरे हाथों की रफ़्तार तेज हो गयी है ब्रश करते करते। आनन फानन में मुँह पर पानी के कुछ छींटे मारकर अपने ही दुपट्टे से पोंछकर किचन की ओर भागती मैं, अभी दस मिनट हैं बच्चों और इन्हें उठाने में ऐसा इशारा किया घड़ी ने मुझे। अरे लो – अपना परिचय तो कराना भूल ही गयी मैं। मैं इला– अर्थात इला सुशान्त वर्मा। उम्र यही कोई ३६-३७ वर्ष और पहचान १३ और ११ वर्ष के दो प्यारे बच्चों की माँ। हाँ हाँ समझती हूँ के पहले मैं पत्नी हुई फिर माँ पर