प्रस्तावना: रक्त से शांति का महाकुंभइतिहास केवल तारीखों और युद्धों का लेखा-जोखा नहीं होता, बल्कि यह उन आत्माओं की यात्रा है जिन्होंने समय की धारा को मोड़ने का साहस किया। 'रक्त और प्रतिज्ञा' एक ऐसी ही गाथा है, जो दक्षिण भारत के महान सेनानायक और प्रधानमंत्री चामुंडराय के जीवन पर आधारित है। यह कहानी हमें दसवीं शताब्दी के उस कालखंड में ले जाती है जहाँ तलवारों की खनक और साम्राज्यों की भूख के बीच एक योद्धा अपने भीतर के बुद्ध को खोजता है।यह पुस्तक चामुंडराय के उस रूपांतरण की कहानी है, जो पल्लव और क्रूर पांड्य राजाओं के विरुद्ध 'वीर