समर्पण से आंगे - 13 - (अंतिम भाग )

‎भाग – 13 last part ‎‎‎‎लेकिन समाज‎अब भी बाहर खड़ा था।‎‎माँ ने पूछा—‎“फैसला कर लिया?”‎‎सृष्टि ने जवाब दिया—‎‎“हाँ। मां जी पर में तारीख बाद ‎में डिसाइड करुंगी।‎‎माँ समझ गईं थी।‎‎यह शादी‎दबाव में नहीं होगी ‎बल्कि दोनों की मर्जी से होगी ।‎‎ सारे शहर में‎खबर फैल गई कि—‎‎“वही विधवा औरत …‎अब शादी कर रही है।”‎‎लेकिन इस बार‎उस खबर में शोर और जहर नहीं था।‎ इस बार खबर में साकारात्मक बतावरण था।‎‎क्योंकि कहानी‎अब सृष्टि और अंकित के हाथ में थी।‎‎फिर भी‎एक सवाल‎अब भी अधूरा था—‎‎क्या दोनों की शादी‎इस कहानी का अंत होगी…‎या‎ एक नई शुरुआत?‎‎क्योंकि असली इम्तिहान‎रिश्ता बनने के बाद‎शुरू होता है।‎‎‎‎शादी की तारीख़ तय