जैसा कि योगेश्वर अग्निवंश ने अश्व धामा को बोला हर रोज वो उसको अपने काल की घटी घटना सुनाएंगे,। जहाँ योगेश्वर अग्निवंश दूसरा प्रश्न करता है और अश्वत्थामा पहली बार उस सत्य को खोलता है,।जिसे युगों से लोग अधूरा जानते हैं। वो सत्य जिस में लोग द्रोणाचार्य को गलत मानते आए है । (अश्वत्थामा की वाणी से )योगेश्वर अग्निवंश ने मेरी ओर देखा।उसकी आँखों में संकोच नहीं था,न ही आरोप केवल सत्य जानने की तीव्र इच्छा थी।उसने धीरे से पूछा—“हे अश्वधामा द्रोणपुत्र,क्या यह सत्य है कि आपके पिता द्रोणाचार्य ने अर्जुन को आशीर्वाद दिया था—कि तुम्हारे समान कोई दूसरा धनुर्धर नहीं होगा?” मैं मौन