मंजिल - पथक और राही - 5

कहानियां न बहुत कुछ सिखाती है, कभी कभी मायूसी मैं रोशनी सी जगा देती है, हल्की सी सुबह की किरण जैसे खिड़की के पास ठहर सी जाती है, और उस रोशनी हम खुद को तलाश पाते है, इसी रोशनी में अक्सर रात के अंधेरे की बात को, सुबह की रोशनी जवाबो को तलाश पाते है कभी कभी कहानी के किरदार आगे बढ़ना सीखा देते है, के रुको नही, बढ़ते रहो,के रुको नही बढ़ते रहो,चलते रहना जीवन का सार है,और इस सार का मजा उठाते रहो,रुक जाओगे, ठहर जाओगे,रुक जाओगे, बैठ जाओगे,जीवन की मंजिल को पाना है,तो रुको नहीं बढ़ते हो,खुशियों