बगावत के सुरएपिसोड 7: न्याय की आग, बदले की छायादरभंगा की सुबहें अब साये से भरी थीं। स्टेशन प्रोजेक्ट की साइट पर मजदूर तेजी से काम कर रहे थे, लेकिन पृथ्वी राठौर की आँखें हर कोने पर टिकी रहतीं। कालिया भाग चुका था, और वो जानता था—ये जंग अभी अधर में लटकी है। सनाया उसके साथ साइट पर आती, फाइलें चेक करती, लेकिन उसकी आँखों में डर साफ झलकता। भानु प्रताप की डायरी ने सब बदल दिया था। पिता का कत्ल—ये राज पृथ्वी के सीने में आग की तरह सुलग रहा था।कालिया की साजिशरात के अंधेरे में कालिया अपने ठिकाने