पुस्तक चर्चा पाखंड के विरुद्ध विजी श्रीवास्तव का निर्भीक शब्द-युद्ध ..

पुस्तक चर्चा   पाखंड के विरुद्ध विजी श्रीवास्तव का निर्भीक शब्द-युद्ध .. "ए जी! सुनते हो' (व्यंग्य संग्रह)चर्चा.. विवेक रंजन श्रीवास्तव  विजी श्रीवास्तव का सद्यः प्रकाशित व्यंग्य संग्रह ए जी सुनते हो , समकालीन हिंदी साहित्य में व्यंग्य की एक ऐसी मशाल बन कर प्रस्तुत हो रहा है जो समाज के अंधेरे कोनों को उजागर करता दिखता है। यह पुस्तक शीर्षक के अनुरूप मात्र हल्का फुल्का हँसाने का साधन नहीं, बल्कि समाज के सामूहिक पाखंड और नैतिक पतन का एक गहरा अन्वेषण है । यह संग्रह पाठकों से कहता है, ए जी सुनते हो? पढ़ो, सुनो , गुनो, और हो सके तो