प्यार नहीं पिंजरा था वो

ट्रेन धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म पर आकर रुक रही थी। रात के नौ बज चुके थे और शहर की चकाचौंध भरी रोशनियाँ अनाया की आँखों में चुभ रही थीं। डरी-सहमी सी अनाया, कंधे पर अपना बैग सँभालते हुए, भीड़ के साथ ट्रेन से नीचे उतर गई।नया शहर…नए लोग…नया नाम…और सबसे ज़रूरी बात — यहाँ कोई उसे पहचानता नहीं था।अनाया ने एक गहरी साँस ली और आगे बढ़ गई।अनाया एक मिडिल क्लास परिवार की सीधी-सादी लड़की थी। छोटे से शहर से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद वह नौकरी की तलाश में मुंबई जैसे बड़े शहर आई थी। लेकिन उसे क्या पता था कि